!!जय माँ भवानी!!

नीलद्युति शूलधरं किरीटिनम् गृध्रस्थितं त्रासकरं धनुर्धरम्!
चतुर्भुजम् सूर्यसुतं प्रशान्तं वन्दे सद् अभीष्टकरं वरेण्यम्!!

नीलान्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम, छाया मार्तण्ड सं भभूतं तं नमामि शनैश्चरम्!
नमस्ते कोणसंस्थाय, पिंगलाय नमोस्तुते!!

नमस्ते बम्भरुपायै,कृष्णाय च नमोस्तुते!
नमस्ते रौद्रदेहाय, नमस्ते अंतकाय च!!

नमस्ते यम संज्ञाय ,नमस्ते सौरये विभो!
नमस्ते मन्दगतये श्री शनैश्चरायै नमोस्तुते!!

आप सभी को आज 20.6.2020, आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी एवं अमावस्या, दिन शनिवार की मंगल कामनाऐं!

समय बहुत अच्छा नहीं है! राक्षस (राहु) का पुत्र कुमार (बुध) के घर पर होना, राजा पिता (सूर्य) का पुत्र के घर पर गोचर करना, रानी माँ) चंद्रमा का भी पुत्र (बुध) के घर पर पहुंचना! इन चारों पर सर कटे दैत्य (केतु) की सीधी दृष्टि होना! क्रूर सेनापति (मंगल) का गुरू (बृहस्पति) के घर तक पहुंचना और पापी शनि की तिरछी तीसरी दृष्टिगत हो जाना, गुरु का पापी (शनि) के घर पर उसी के साथ असहाय स्थिति 0 (शून्य) डिग्री पर होना, दैत्य गुरु (शुक्र) का अपने घर पर आराम करना! इन सब पर अमावस्या की तिथि होना! लगभग सभी मुख्य ग्रहों का वक्री चाल चलना! ऐसा लग रहा है मानो देवताओं पर फिर से दैत्यों का अधिपत्य हो! ऐसे में राजा (सूर्य) का ग्रसित होकर ग्रहण लगना कहीं से भी शुभ संकेत नहीं देता! इस खगोलिय घटना का सीधा असर प्रकृति के साथ-साथ, धरती पर आम जनमानस पर भी पड़ेगा!

ऐसे वक्त पर सलाह यही है कि डरें और डरायें नहीं, क्योंकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में मन को शांत व एकाग्रचित रखने से बड़ी से बड़ी समस्या का हल मिल जाता है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा समय ध्यान व योग क्रियाओं में लगायें! माँ भगवती हम सभी पर ऐसे विस्फोटक समय में अपना आशीष बनाये रखकर हमें शांतचित रहने में सहाय हों!

!!जय माँ भवानी!!

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