इस आधुनिक व्यस्तता के समय में व्यक्ति भौतिक जीवन में शीघ्र सफलता एवं अपने सकल विघ्नों से पार पाने के लिए न जाने कौन कौन से उपाय खोजता और करता या करवाता है! आधुनिक दौर के आधुनिक गुरुओं ने भी व्यक्ति विशेष की परेशानियों के लिए अपने-अपने हिसाब से नए-नए तरीकों का आविष्कार कर रखा है और लाखों लोग इन आधुनिक बाबाओं की गिरफ्त में अपना समूल नष्ट करने पर उतारू हैं!

सम्पूर्ण वेदों का पठन पाठन और उन्हें स्मरण करते हुए अपने प्रत्येक कार्य को करना आज के युग में संभव नहीं क्यूंकि प्रत्येक व्यक्ति मोह व माया के वश में है! मनुष्य जीवन के इस दौर को भी हमारे ऋषि मुनियों ने लाखों वर्ष पहले वैदिक काल में ही ज्ञात कर लिया था और उन्होंने सरलतम विधि में वेदों को कई सूक्तों व उपनिषदों में हमारे लिए वर्णित कर दिया जिससे हम सभी अपने सभी अनिष्टों का निवारण सरल तरीके से कर सकें!

यदि भारत में वेदों को शिक्षण प्रणाली में सम्मिलित किया गया होता तो आज के परमाणु युग में भी हम विश्व गुरु के स्थान पर होते, परन्तु स्वार्थ सिद्धि वश हमारे पूर्व राजनीतिज्ञों ने हमें एक ऐसे अंधे कुँए में ढकेल दिया जिसमें से निकल पाना हर किसी के बस की बात नहीं! प्रमाणिक शास्त्रों में वर्णित बातों को सत्य सनातन मानकर उसका अनुसरण करना ही इस भटकाव से बचने का एक मात्र साधन है!

वैदिक सूक्त का अर्थ

मन मस्तिष्क को शांत रखने की विद्या हैं हमारे वैदिक सूक्त! समस्त ज्ञात-अज्ञात ज्ञान के स्तोत्र वेद ही हैं! वेदों में मनुष्य के अभीष्ट साधन के लिए सूक्त रूपी मणियाँ हैं! सूक्त अर्थात स्पष्ट व शुद्ध रीति से कहा गया विशेष वैदिक मन्त्रसमूह! सूक्त में देवी-देवताओं के विशेष ध्यान, पूजन तथा स्तुति का वर्णन होता है! वैदिक सूक्तों के जप और पाठ से सभी प्रकार के क्लेश से मुक्ति मिलती है और मानव बाह्य व अंतःकरण से शुद्ध व पवित्र हो जाता है!

अग्नि सूक्त, सवितृ सूक्त, विष्णु सूक्त, इन्द्र सूक्त, रुद्र सूक्त, बृहस्पति सूक्त, अश्विनी सूक्त, वरुण सूक्त, उषस् सूक्त, सोम सूक्त इत्यादि हमारे हिन्दू शास्त्रों में अनेक सूक्त वर्णित हैं! वैदिक सूक्त मनवांछित फलों की प्राप्ति का श्रेष्ठ साधन होते हैं, अतः प्रत्येक मनुष्य को अपने दैनिक कर्मों में अपने ईष्ट देव की स्तुति वैदिक सूक्तों के द्वारा अवश्य करनी चाहिए!

इस लेख को अपने मित्रों के साथ साझा करें:

Leave a Reply