प्रत्येक राशि के जातकों पर 21-जून-2020 को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण का प्रभाव जानने से पहले इस सूर्य ग्रहण की कुछ विशेषताएं जान लेना आवश्यक है जिसके कारण यह सूर्य ग्रहण खास बन जाता है?

जब चन्द्रमा पृथ्वी से बहुत दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात चन्द्रमा सूर्य को इस प्रकार से ढंक देता है कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही चंद्रमा के छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य का बाहरी क्षेत्र प्रकाशमान दिखाई देता है जिसके कारण कंगन या वलय की गोल चमकती हुई आकृति दिखाई देती है, इस खगोलीय घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) कहा जाता है!

21-जून-2020 को वलयाकार सूर्य ग्रहण होने जा रहा है जो कि अधिकांश भू-मंडल पर दिखाई देगा! यह ग्रहण भारत समेत पूरे एशिया एवं दक्षिण पूर्व यूरोप एवं ऑस्ट्रेलिया में भी देखा जा सकेगा! सम्पूर्ण सूर्यग्रहण की वास्तविक अवधि अधिक से अधिक 11 मिनट ही हो सकती है उससे अधिक नहीं! 21-जून-2020 के सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य और चन्द्रमा के केंद्र बिन्दुओं का मिलन मात्र 38 सेकेण्ड के लिए होगा! ऐसा माना जा रहा है की ऐसा सूर्य ग्रहण 900 वर्ष बाद पड़ रहा है, और वैज्ञानिक इस ग्रहण को इतिहास के कुछ चुनिन्दा सूर्य ग्रहणों में इसे शामिल करने की तयारी कर चुके हैं! 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 21-जून-2020 का यह ग्रहण चूणामणि योग वाला ग्रहण है! हिन्दू पञ्चांग के अनुसार यह ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र एवं मिथुन राशि में होगा! मिथुन राशि में होने से यह ग्रहण व्यापारी वर्ग पर अपना बुरा प्रभाव अवश्य डालेगा! राजयुद्ध एवं दुर्भिक्ष जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है! साथ ही ग्रहण के दौरान भारतीय ज्योतिष शास्त्र के 9 ग्रहों में से मुख्य 4 ग्रह बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि वक्री चाल चलेंगे वहीँ राहु और केतु सर्वथा वक्री चाल चलते हैं और क्रूर मंगल ग्रह पर पापी शनि ग्रह की दृष्टि और मंगल की मिथुन राशि पर सूर्य, चन्द्रमा, राहु, एवं बुध पर चौथी दृष्टि इस सूर्य ग्रहण को और भी विशेष व घातक बना रही है!

सूर्य ग्रहण कैसे होता है? क्यों होता है?

वैज्ञानिक व वैदिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण के महत्व को समझने के लिए हमारे लेख सूर्य की शक्ति अध्यात्म और विज्ञान को आप अवश्य पढ़ें, जिससे आपको भी सूर्य ग्रहण की इस खगोलीय घटना के विशेष महत्व व इसमें छुपे हुए कई रहस्यों को जानने में मदद मिलेगी!

सूर्य ग्रहण का सूतक, स्पर्श एवं मोक्ष का समय

सूर्य ग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर पूर्व सूतक माना जाता है! इस सूर्य ग्रहण के सूतक का प्रारम्भ 20-जून-2020 को रात्रि 9:33 pm से होगा एवं सूतक का अंत 21-जून-2020 को ग्रहण काल के बाद दोपहर 02:07 pm पर होगा! भारतीय समय अनुसार सूर्य ग्रहण का आरंभ 21-जून-2020 की सुबह 10:42 am पर होगा, ग्रहण का मध्य दोपहर 12:24 pm पर होगा और ग्रहण का मोक्ष दोपहर 02:07 pm पर होगा! इस ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 35 मिनट की रहेगी!

इस सूर्य ग्रहण का काल बहुत लंबा है और यही इस ग्रहण को विशेष बना देता है! ग्रहण के दौरान कुछ लक्षण ऐसे हो सकते हैं जैसे महावायु चलना, महाभय उत्पन्न होना, बादल ऐसे भरे हों जैसे अभी बरस पड़ेंगे लेकिन वर्षा न हो या बहुत ही मूसलाधार वर्षा होना! विन्ध्याचल व अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में तेज हवा चलना एवं उससे कुछ नुकसान भी संभव है!

इसके बाद वर्ष के अंत में 14-दिसंबर-2020 को खग्रास सूर्य ग्रहण होगा, जो कि भारत के किसी भी भाग में दिखाई नहीं देगा! ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भारत में या यहाँ के जनमानस पर उसका कोई असर नहीं होगा, क्यूंकि ज्योतिष शास्त्र दृष्टि विज्ञान पर आधारित है, जो दिखता है वही प्रमाणिक है और जो नहीं दिखता उसका ज्योतिष शास्त्र में कोई स्थान नहीं होता!

ग्रहण काल में हमारे ऋषि मुनियों ने बहुत से नियम बताये हैं जिन्हें हम आसानी से अपना सकते हैं अधिक जानने के लिए हमारे लेख क्या न करें ग्रहण काल के दौरान को अवश्य पढ़ें!

ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति पर उसकी जन्म राशि के अनुसार ग्रहण का क्या असर होगा आइये अगले पृष्ठ पर जानते हैं!

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